Thursday, May 7, 2009

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गीतानि

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संस्कृत भाषा पर कुठाराघात किए जाने की निन्दा

दैनिक जागरण,जालन्धर,4 मई 2001
संस्कृत भाषा पर कुठाराघात किए जाने की निन्दा

पठानकोट 3,मई(संस)। अपने-आप को हिन्दू कहने वाली वर्तमान सरकार ने जिस प्रकार से संस्कृत भाषा पर कुठाराघात किया है वह निन्दनीय है। यह बात महिला कांग्रेस आई की नेता श्रीमती राज डोगरा ने प्रैस को जारी एक बयान में कही। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय विद्यालयों में पाँचवी से नवमी तक पहले संस्कृत भाषा अनिवार्य थी परन्तु अब हिन्दूत्व का नारा देने वाली वर्तमान सरकार ने नई नीति तैयार कर दी है जिसके अधीन अब आठवीं कक्षा के बाद की पढ़ाई करने के लिए प्रत्येक विद्यार्थी तीन में से कोई दो विषय चुन सकता है। राजडोगरा ने कहा कि सरकार की इसी नीति के कारण स्थानीय केन्द्रीय विद्यालय नम्बर एक में किसी भी छात्र ने संस्कृत विषय को न चुनकर अन्य दो विषयों को चुना है।

Sunday, April 26, 2009

अम्बेदकर का संस्कृत प्रशासनिक भाषा प्रस्ताव

डा. अम्बेदकर ने संस्कृत को प्रशासनिक भाषा का प्रस्ताव किया था
दैनिक जागरण ( जालन्धर, सोमवार, 7 मई 2001 )
पठानकोट, 6 मई (जसं) । देश की प्रशासकीय भाषा हेतु भारतीय संविधान के निर्माता भीमराव अम्बेदकर ने संस्कृत के पक्ष में जो प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, उसका सभी प्रान्तों के प्रतिनिधि विद्वानों की ओर से हस्ताक्षरित समर्थन किया गया था। यह बात सर्वहितकारी शिक्षा समिति (पँजाब) के उपाध्यक्ष यशपाल मेहता ने कही। उन्होंने कहा कि 26 मार्च 2000 को दिल्ली के विज्ञान भवन में मानव संसाधन मंत्री मुरलीमनोहर जोशी ने कहा था कि आध्यात्मिकता, साहित्य, विज्ञान, ज्योतिष शास्त्र, वास्तुकला, गणित, न्याय दर्शन, व्याकरण, भाषा विज्ञान आयुर्वेद तथा अनेक ज्ञान की विद्याओं का प्रवाह संस्कृत में हो रहा है। अतः हमें संस्कृत शिक्षण प्रसार प्रचार में पूर्ण योगदान करना चाहिए तथा इस संबंध में गत 5 अप्रैल, 2001 को वाजपेयी जी ने विश्‍व संस्कृत सम्मेलन में कहा था कि वे पण्डित घराने में जन्में हैं और उन्होंने संस्कृत विषय बी.ए. तक पढ़ा हुआ इसके बावजूद् वह संस्कृत बोल नहीं सकते और न ही संस्कृत में किसी से वार्तालाप कर सकते हैं, इससे बड़ी पीड़ा की बात उनके लिए क्या हो सकती है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा के प्रति इतना मोह रखने वाले नेताओं की ओर से संस्कृत भाषा को आठवीं से बंद करने की बात क्यों की जा रही है। सरकार की ओर से निर्णय लिया गया है कि नौवीं के बाद कोई व्यक्‍ति संस्कृत पढ़ना चाहता है तो उसे हिन्दी, अंग्रेज़ी व संस्कृत में से कोई भी दो विषय चुनने पड़ेगे। उन्होंने कहा कि सरकार के इस निर्णय से संस्कृत पढ़ने वालों की संख्या शून्य हो जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को अग्रेज़ सरकार का धन्यवाद करना चाहिए कि उनके शासन में उन्होंने संस्कृत पढी है तथा अब केन्द्रीय विद्यालय का विद्यार्थी केवल आठवीं तक संस्कृत पढ़ने वाला होगा तो बी.ए. तक संस्कृत कहाँ से पढ़ेगा? उन्होंने कहा कि केन्द्रीय विद्यालय में पढ़ने वाले मंत्रियों और सासदों के बच्चे भी संस्कृत नहीं पढ़ पाएँगे। तदर्थ माननीय नेताओं से निवेदन किया जाता है कि वह इस निर्णय पर शीघ्र पुनर्विचार करें और इस दिशा में सही कदम उठाकर निर्णय लें।